अपनो का सताया आज फिर याद आया
फिर वही दर्द आज आंखों में आया
आज तड़प कर कहता हूं उस दिव्य शक्ति को
इस मतलब की दुनिया मे तूने मुझे इंसान क्यो बनाया
हर किसी के दर्द को अपनाता रहा मैं नादान
आज खुद पर आई तो हर किसी को पराया पाया
किसको दिखाऊ अपनी मजबूरी के जख्म
जिसको दिखाया उसी ने उन पर नमक लगाया
रह गया फिर #सागर तन्हा अपनी ही आगोश में
साहिल भी छोड़ भागे जब नजदीक किनारा आया
बहारों का समां था तो परिंदे भी आते थे
ये पतझड़ क्या आया कि फिजाओ में भी वीराना है छाया
मैं फिर पूछता हूं उस दिव्य शक्ति से
इस मतलब की दुनिया मे मुझे इंसान क्यो बनाया
#सागर
फिर वही दर्द आज आंखों में आया
आज तड़प कर कहता हूं उस दिव्य शक्ति को
इस मतलब की दुनिया मे तूने मुझे इंसान क्यो बनाया
हर किसी के दर्द को अपनाता रहा मैं नादान
आज खुद पर आई तो हर किसी को पराया पाया
किसको दिखाऊ अपनी मजबूरी के जख्म
जिसको दिखाया उसी ने उन पर नमक लगाया
रह गया फिर #सागर तन्हा अपनी ही आगोश में
साहिल भी छोड़ भागे जब नजदीक किनारा आया
बहारों का समां था तो परिंदे भी आते थे
ये पतझड़ क्या आया कि फिजाओ में भी वीराना है छाया
मैं फिर पूछता हूं उस दिव्य शक्ति से
इस मतलब की दुनिया मे मुझे इंसान क्यो बनाया
#सागर
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