Sunday, 27 August 2017

मतलब की दुनिया

अपनो का सताया आज फिर याद आया
फिर वही दर्द आज आंखों में आया
आज तड़प कर कहता हूं उस दिव्य शक्ति को
इस मतलब की दुनिया मे तूने मुझे इंसान क्यो बनाया
हर किसी के दर्द को अपनाता रहा मैं नादान
आज खुद पर आई तो हर किसी को पराया पाया
किसको दिखाऊ अपनी मजबूरी के जख्म
जिसको दिखाया उसी ने उन पर नमक लगाया
रह गया फिर #सागर तन्हा अपनी ही आगोश में
साहिल भी छोड़ भागे जब नजदीक किनारा आया
बहारों का समां था तो परिंदे भी आते थे
ये पतझड़ क्या आया कि फिजाओ में भी वीराना है छाया
मैं फिर पूछता हूं उस दिव्य शक्ति से
इस मतलब की दुनिया मे मुझे इंसान क्यो बनाया
#सागर